| ش | ی | د | س | چ | پ | ج |
| 1 | 2 | 3 | 4 | 5 | 6 | 7 |
| 8 | 9 | 10 | 11 | 12 | 13 | 14 |
| 15 | 16 | 17 | 18 | 19 | 20 | 21 |
| 22 | 23 | 24 | 25 | 26 | 27 | 28 |
| 29 | 30 | 31 |
من چه می گویم در این رویین حصار ؟
من چه می جویم در این شبهای تار؟
من چه میپویم در این شهر غریب پای این دیوارهای نانجیب؟
تا نپنداری گلم در دامن است گل در اینجا دود قیر و آهن است
قلبهامان آشیانهای خراب
خانه هامان خلوت و بی آفتاب
جان پاکان خسته از این آفت است
روزگار مرگ انسانیت است